गोरखपुर में पहली बार हुआ पोल्ट्री कॉन्क्लेव, आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों पर हुआ मंथन

गोरखपुर में पहली बार हुआ पोल्ट्री कॉन्क्लेव, आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों पर हुआ मंथन

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गोरखपुर में पहली बार पोल्ट्री कॉन्क्लेव-२०२६ का आयोजन बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में किया गया। कॉन्क्लेव में पोल्ट्री उद्योग की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं, नई तकनीकों, रोग नियंत्रण, निवेश और रोजगार के अवसरों को लेकर विशेषज्ञों, किसानों और उद्यमियों ने विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पिपराइच विधायक महेंद्र पाल सिंह एवं सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ला मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने कुक्कुट विकास समिति के पदाधिकारियों को सम्मानित किया।

कुक्कुट विकास संगठन के पूर्वांचल प्रभारी डीपी सिंह ने कहा कि संगठन पोल्ट्री उद्योग के विकास के लिए लगातार सहयोग कर रहा है। इससे किसानों और युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। पोल्ट्री क्षेत्र को बढ़ावा मिलने से पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह ने कहा कि पोल्ट्री क्षेत्र में किसानों और उद्यमियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकार के सहयोग से आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाकर इस क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है।

कॉन्क्लेव में कुशीनगर के जिलाध्यक्ष वृजेंद्र सिंह, जिला संयोजक रवि प्रताप सिंह, गोरखपुर के जिलाध्यक्ष संदीप मोदनवाल, देवरिया के जिलाध्यक्ष कमर आलम तथा महाराजगंज के जिलाध्यक्ष आनंद सिंह सहित कुक्कुट विकास समिति एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पोल्ट्री फार्म संचालकों और किसानों ने भी भाग लिया। उन्होंने कुक्कुट उद्योग के विकास, नई तकनीकों तथा बाजार की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि पोल्ट्री उद्योग केवल अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि चारा उत्पादन, दाना उद्योग, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन सहित कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है।

कॉन्क्लेव में कुक्कुट विकास संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार से पोल्ट्री किसानों और उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से किसानों, उद्यमियों और विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ेगा तथा पूर्वांचल में पोल्ट्री उद्योग के विकास को नई दिशा मिलेगी।

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