प्रसिद्ध समाचार

क्षेत्रीय समाचार

  • गैंगस्टर के दोषी को तीन वर्ष 11 माह की कैद

    गैंगस्टर के दोषी को तीन वर्ष 11 माह की कैद

    कैरना (शामली)। एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में एक दोषी को तीन वर्ष 11 माह के कारावास की सजा सुनाई है।

    बता दें कि वर्ष 2003 में बाबरी थाने पर प्रमेंद्र निवासी हाथी करौदा के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में पुलिस ने आरोपी के विरूद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। सोमवार शाम लगभग साढ़े सात बजे पुलिस ने बताया कि उक्त मामले में कैराना स्थित एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया, जिस पर दोषी को तीन वर्ष 11 माह के कारावास और छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

विशेष समाचार

  • उत्तर प्रदेश में पहली बार भव्य “पोल्ट्री कॉन्क्लेव 2026” का सफल आयोजन, निवेश और निर्यात की दिशा में बड़ा कदम

    उत्तर प्रदेश में पहली बार भव्य “पोल्ट्री कॉन्क्लेव 2026” का सफल आयोजन, निवेश और निर्यात की दिशा में बड़ा कदम

    लखनऊ। प्रदेश में पोल्ट्री क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 को पशुपालन विभाग द्वारा पहली बार “उत्तर प्रदेश पोल्ट्री कॉन्क्लेव 2026” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन पोल्ट्री इंडिया के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसे प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस.पी. सिंह बघेल, राज्य मंत्री, मत्स्य, पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि दिनेश प्रताप सिंह, मंत्री, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार तथा धर्मपाल सिंह, मंत्री, पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार भी उपस्थित रहे।

    कॉन्क्लेव में प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इसमें अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, विशेष सचिव देवेंद्र कुमार पांडे, डॉ. पी.के. शुक्ला (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, डुवासु), उदय सिंह बयास (प्रेसिडेंट, आईपीईएमए), ओ.पी. सिंह (एमडी, एबीटीएल), दीपक तुषीर (सीईओ), मोहित मलिक (प्रेसिडेंट, ब्रीडर्स एसोसिएशन), रामपाल टांडा (प्रेसिडेंट, पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया), अनीश अंसारी (पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश), डॉ. मेमपाल सिंह (निदेशक, प्रशासन एवं विकास) तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद (निदेशक, रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।

    कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और अतिथियों ने प्रदेश में अंडा उत्पादन की वर्तमान स्थिति और उसकी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि उत्पादन में कमी को दूर करते हुए पोल्ट्री सेक्टर को सुदृढ़ बनाया जाए, ताकि यह क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बने बल्कि भविष्य में निर्यात के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सके।

    वक्ताओं ने यह भी कहा कि पोल्ट्री उद्योग में निवेश की अपार संभावनाएं हैं और इसके माध्यम से किसानों एवं उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। साथ ही, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्रशिक्षण के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक संगठित एवं प्रतिस्पर्धी बनाने पर बल दिया गया।

    कॉन्क्लेव के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों, पोल्ट्री प्रोग्राम अधिकारियों एवं सफल पोल्ट्री उद्यमियों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर प्रदेश में पोल्ट्री सेक्टर में निवेश बढ़ाने और आम जनमानस को इसके प्रति जागरूक करने का भी आह्वान किया गया।

    इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए किसानों, उद्यमियों, विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों, छात्रों एवं विभागीय अधिकारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कुल मिलाकर, “उत्तर प्रदेश पोल्ट्री कॉन्क्लेव 2026” राज्य में पोल्ट्री क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

इस्लामिक समाचार

  • नंगलाराई के मदरसे में जलसे का आयोजन

    नंगलाराई के मदरसे में जलसे का आयोजन

    मुजफ्फरनगर (विशेष संवाददाता): 

    दारुल उलूम देवबंद के पूर्व शेख़ुल कुर्रा और राब्ता आलम—ए—इस्लामी मक्का मुकर्रमा के सदस्य कारी अल-मुकरी अबुल हसन आज़मी ने कहा है कि कुरआन—ए—करीम पर अमल करो, इससे पहले कि यह पवित्र किताब तुम्हारे सीनों से मिट जाए और तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाए। यही वह वक्त होगा जब कोई नेक अमल इंसान के काम नहीं आएगा। कारी अल—मुकरी अबुल हसन आज़मी मुजफ्फरनगर जिले के गांव नंगलाराई स्थित मदरसा दारुल किरात हसनिया में 18 हाफ़िज़े कुरान की दस्तारबंदी के मौके पर आयोजित जलसे की आखिरी मजलिस से खिताब कर रहे थे। 

    जामिया बदरुल उलूम गढ़ी दौलत के उस्ताद—ए—हदीस मुफ्ती खालिद कासमी ने कहा कि इंसान जब दुनिया से रुख्सत होता है तो उसके तीन अमल ऐसे हैं जो मरने के बाद भी काम आते रहते हैं, इनमें सदका-ए-जारिया, नफ़ा पहुंचाने वाला इल्मी सरमाया और नेक औलाद। अफसोस की बात है कि हम इन तीनों क्षेत्रों पर बहुत कम ध्यान देते हैं। खास तौर पर औलाद का मसला इतना गंभीर होता जा रहा है कि माता—पिता ने औलाद की निगरानी और तरबियत से पूरी तरह मुंह फेर लिया है।

    इशाअतुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती नसीम कासमी ने कहा कि जब बुनियादी अकीदा ही कमज़ोर हो जाता है तो सारे अमल उसी तरह कमज़ोर होते चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि तौहीद व रिसालत, आखिरत, तकदीर और आस्मानी किताबें जैसे बुनियादी अकीदा हमारे ईमान का लाज़िमी हिस्सा हैं। इन अकीदों की सही तालीम से हम गफलत कर रहे हैं, जिसकी वजह से हम बतौर मुसलमान आमाल सालेहा से बहुत पीछे हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह की सिफात, कुदरत तथा रसूल की रिसालत और आखिरत पर जितना मज़बूत ईमान होगा, उतना ही इंसान अपनी ज़िंदगी को नेक सांचे में ढालेगा।

    मुफ्ती अहमद ने कहा कि अगर इंसान हराम काम से बचने की ठान ले तो बड़ा इबादत गुजार बन जाए, क्योंकि यही चीज़ फसाद की जड़ होती है। उन्होंने कहा कि झूठ, वादा खिलाफी और खयानत जैसे हराम कामों से अगर हम बचने लगें तो हमारा दिल साफ और शफ्फाफ हो जाएगा। मौलाना ने कहा कि अंदरूनी बीमारियों जैसे हसद, बुग्ज़, कीना और तकब्बुर से भी सच्ची तौबा करनी होगी, तभी हम दुनिया और आखिरत में कामयाब हो सकेंगे। उन्होंने तालीम, सुन्नत की पाबंदी और ज़रूरी इल्म हासिल करने पर भी ज़ोर दिया।

    मौलवी साकिब सिराज कासमी ने उलेमा की सोहबत और उसके फायदों पर रोशनी डाली।

    जलसे की एक मजलिस में मदरसे के रूह-ए-रवां और अरबी ज़बान के इंशापर्दाज़ मुफ्ती मुहम्मद बिलाल कासमी ने कारी अबुल हसन आज़मी को सिपास नामा पेश करते हुए कहा कि कारी अल-मुकरी अबुल हसन आज़मी ने तजवीद और किरात के फन पर सौ से ज़्यादा किताबें लिखकर इल्मी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। कारी मोहतरम की पूरी ज़िंदगी दर्स व तदरीस में गुज़री है, अभी भी वह तलबा को फन से रोशनास कराते रहते हैं। वह राब्ता आलम—ए—इस्लामी मक्का मुकर्रमा के सदस्य हैं। कारी मोहतरम खुद एक मिशन हैं, जिनके हज़ारों शागिर्दाने रशीद उनके फन की आबियारी में मसरूफ हैं। इससे पहले हाफ़िज़ फरमान, मुहम्मद अहमद, फहद, शायान, उमर, अरमान, सलमान और चांद समेत 18 हाफ़िज़—ए—कुरान तलबा की उलेमा-ए-किराम के हाथों दस्तारबंदी हुई। इस मौके पर मौलाना इरशाद अकाबी ने मदारिस और कुरान के ताल्लुक से बयान किया। वहीं, मदरसे के तलबा व तालिबात ने इस्लाही मुकालमे, नज़्में और हालाते हाज़िरा के ताल्लुक से तकारीर भी पेश कीं। अंत में मदरसे के मोहतमिम कारी मुहम्मद शहज़ाद ने हाज़िरीन का शुक्रिया अदा किया। यह जलसा बुज़ुर्ग आलिम—ए—दीन मौलाना मुहम्मद इलियास की दुआ पर संपन्न हुआ। दोनों मजलिसों की निज़ामत मुफ्ती मुहम्मद बिलाल कासमी और मौलाना साकिब सिराज ने संयुक्त रूप से की।

    जलसे में मिफ्ताहुल उलूम के उस्ताद—ए—हदीस मुफ्ती रईस अहमद, दारुल उलूम देवबंद से मौलाना मुकीम, मौलाना मूसा कासमी, मौलाना सलीम, कारी नौशाद, कारी दिलशाद, कारी वसीम, शाहिद भाई, मुहम्मद इरशाद, मेराज अहमद, मुनीर अहमद, मौलाना जाबिर, हाफ़िज़ फुरकान असअदी, कारी आज़म, कारी सुहैल, कारी साकिब, कारी फैसल, कारी शुऐब, हाजी मुकीम और जावेद आदि खास तौर पर मौजूद रहे।


वीडियो

फतावा

आगंतुकों
1
1
6
3
2