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  • गैंगस्टर के दोषी को तीन वर्ष 11 माह की कैद

    गैंगस्टर के दोषी को तीन वर्ष 11 माह की कैद

    कैरना (शामली)। एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में एक दोषी को तीन वर्ष 11 माह के कारावास की सजा सुनाई है।

    बता दें कि वर्ष 2003 में बाबरी थाने पर प्रमेंद्र निवासी हाथी करौदा के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में पुलिस ने आरोपी के विरूद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। सोमवार शाम लगभग साढ़े सात बजे पुलिस ने बताया कि उक्त मामले में कैराना स्थित एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया, जिस पर दोषी को तीन वर्ष 11 माह के कारावास और छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

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  • पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 रोजगार और कौशल विकास का बड़ा मंच बनेगा: नवाब अली अकबर

    पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 रोजगार और कौशल विकास का बड़ा मंच बनेगा: नवाब अली अकबर

    24 से 27 नवंबर तक हैदराबाद में होगा 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो, धार्मिक पर्वों के दौरान अंडे और चिकन के विरोध से उद्योग को होने वाले नुकसान पर भी जताई चिंता

    नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: भारतीय पोल्ट्री उपकरण निर्माता संघ (आईपीईएमए) ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 18वें पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 की घोषणा की। इस अवसर पर नवाब अली अकबर ने पोल्ट्री क्षेत्र में रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक्सपो युवाओं, किसानों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और एग्री-टेक उद्यमियों के लिए नए अवसरों का बड़ा मंच साबित होगा।उन्होंने कहा कि भारत का पोल्ट्री क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और इससे ग्रामीण युवाओं समेत विभिन्न वर्गों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने धार्मिक पर्वों के दौरान कुछ राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में अंडे और चिकन के विरोध को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, इस तरह के विरोध से उत्पादन और बिक्री प्रभावित होती है तथा पोल्ट्री फार्म संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकारों से बातचीत और आवेदन के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।

    आईपीईएमए के अनुसार, 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 24 से 27 नवंबर तक हैदराबाद में आयोजित होगा। 24 नवंबर को एचआईसीसी/नोवोटेल, हाईटेक सिटी में ज्ञान दिवस संगोष्ठी होगी, जबकि 25 से 27 नवंबर तक एचआईटीईएक्स प्रदर्शनी केंद्र में मुख्य प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। आयोजकों को 120 से अधिक देशों के 550 से ज्यादा प्रदर्शकों और 51 हजार से अधिक उद्योग विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है।प्रदर्शनी में प्रजनन एवं आनुवंशिकी, हैचरी, फार्म स्वचालन, चारा उत्पादन, उन्नत पोषण, पर्यावरण नियंत्रित आवास एवं वेंटिलेशन, पशु चिकित्सा जांच, जैव सुरक्षा, अंडा प्रसंस्करण, खाद प्रबंधन और हरित पोल्ट्री तकनीकों को प्रमुखता दी जाएगी। इसके अलावा फार्म प्रबंधन, उपकरण निर्माण, परिवहन, शीत शृंखला, खाद्य प्रसंस्करण, बिक्री एवं विपणन, अनुसंधान तथा एग्री-टेक उद्यमों से जुड़े रोजगार और कारोबारी अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।आयोजकों ने बताया कि एक्सपो को 20 से अधिक विदेशी पोल्ट्री संगठनों, 40 से ज्यादा राष्ट्रीय पोल्ट्री निकायों और अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री मीडिया का समर्थन प्राप्त है। ‘वन नेशन, वन एक्सपो’ की थीम पर आयोजित यह कार्यक्रम किसानों, युवाओं, उद्यमियों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने के साथ देश के विकास लक्ष्य में योगदान देने पर केंद्रित रहेगा।

इस्लामिक समाचार

  • नंगलाराई के मदरसे में जलसे का आयोजन

    नंगलाराई के मदरसे में जलसे का आयोजन

    मुजफ्फरनगर (विशेष संवाददाता): 

    दारुल उलूम देवबंद के पूर्व शेख़ुल कुर्रा और राब्ता आलम—ए—इस्लामी मक्का मुकर्रमा के सदस्य कारी अल-मुकरी अबुल हसन आज़मी ने कहा है कि कुरआन—ए—करीम पर अमल करो, इससे पहले कि यह पवित्र किताब तुम्हारे सीनों से मिट जाए और तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाए। यही वह वक्त होगा जब कोई नेक अमल इंसान के काम नहीं आएगा। कारी अल—मुकरी अबुल हसन आज़मी मुजफ्फरनगर जिले के गांव नंगलाराई स्थित मदरसा दारुल किरात हसनिया में 18 हाफ़िज़े कुरान की दस्तारबंदी के मौके पर आयोजित जलसे की आखिरी मजलिस से खिताब कर रहे थे। 

    जामिया बदरुल उलूम गढ़ी दौलत के उस्ताद—ए—हदीस मुफ्ती खालिद कासमी ने कहा कि इंसान जब दुनिया से रुख्सत होता है तो उसके तीन अमल ऐसे हैं जो मरने के बाद भी काम आते रहते हैं, इनमें सदका-ए-जारिया, नफ़ा पहुंचाने वाला इल्मी सरमाया और नेक औलाद। अफसोस की बात है कि हम इन तीनों क्षेत्रों पर बहुत कम ध्यान देते हैं। खास तौर पर औलाद का मसला इतना गंभीर होता जा रहा है कि माता—पिता ने औलाद की निगरानी और तरबियत से पूरी तरह मुंह फेर लिया है।

    इशाअतुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती नसीम कासमी ने कहा कि जब बुनियादी अकीदा ही कमज़ोर हो जाता है तो सारे अमल उसी तरह कमज़ोर होते चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि तौहीद व रिसालत, आखिरत, तकदीर और आस्मानी किताबें जैसे बुनियादी अकीदा हमारे ईमान का लाज़िमी हिस्सा हैं। इन अकीदों की सही तालीम से हम गफलत कर रहे हैं, जिसकी वजह से हम बतौर मुसलमान आमाल सालेहा से बहुत पीछे हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह की सिफात, कुदरत तथा रसूल की रिसालत और आखिरत पर जितना मज़बूत ईमान होगा, उतना ही इंसान अपनी ज़िंदगी को नेक सांचे में ढालेगा।

    मुफ्ती अहमद ने कहा कि अगर इंसान हराम काम से बचने की ठान ले तो बड़ा इबादत गुजार बन जाए, क्योंकि यही चीज़ फसाद की जड़ होती है। उन्होंने कहा कि झूठ, वादा खिलाफी और खयानत जैसे हराम कामों से अगर हम बचने लगें तो हमारा दिल साफ और शफ्फाफ हो जाएगा। मौलाना ने कहा कि अंदरूनी बीमारियों जैसे हसद, बुग्ज़, कीना और तकब्बुर से भी सच्ची तौबा करनी होगी, तभी हम दुनिया और आखिरत में कामयाब हो सकेंगे। उन्होंने तालीम, सुन्नत की पाबंदी और ज़रूरी इल्म हासिल करने पर भी ज़ोर दिया।

    मौलवी साकिब सिराज कासमी ने उलेमा की सोहबत और उसके फायदों पर रोशनी डाली।

    जलसे की एक मजलिस में मदरसे के रूह-ए-रवां और अरबी ज़बान के इंशापर्दाज़ मुफ्ती मुहम्मद बिलाल कासमी ने कारी अबुल हसन आज़मी को सिपास नामा पेश करते हुए कहा कि कारी अल-मुकरी अबुल हसन आज़मी ने तजवीद और किरात के फन पर सौ से ज़्यादा किताबें लिखकर इल्मी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। कारी मोहतरम की पूरी ज़िंदगी दर्स व तदरीस में गुज़री है, अभी भी वह तलबा को फन से रोशनास कराते रहते हैं। वह राब्ता आलम—ए—इस्लामी मक्का मुकर्रमा के सदस्य हैं। कारी मोहतरम खुद एक मिशन हैं, जिनके हज़ारों शागिर्दाने रशीद उनके फन की आबियारी में मसरूफ हैं। इससे पहले हाफ़िज़ फरमान, मुहम्मद अहमद, फहद, शायान, उमर, अरमान, सलमान और चांद समेत 18 हाफ़िज़—ए—कुरान तलबा की उलेमा-ए-किराम के हाथों दस्तारबंदी हुई। इस मौके पर मौलाना इरशाद अकाबी ने मदारिस और कुरान के ताल्लुक से बयान किया। वहीं, मदरसे के तलबा व तालिबात ने इस्लाही मुकालमे, नज़्में और हालाते हाज़िरा के ताल्लुक से तकारीर भी पेश कीं। अंत में मदरसे के मोहतमिम कारी मुहम्मद शहज़ाद ने हाज़िरीन का शुक्रिया अदा किया। यह जलसा बुज़ुर्ग आलिम—ए—दीन मौलाना मुहम्मद इलियास की दुआ पर संपन्न हुआ। दोनों मजलिसों की निज़ामत मुफ्ती मुहम्मद बिलाल कासमी और मौलाना साकिब सिराज ने संयुक्त रूप से की।

    जलसे में मिफ्ताहुल उलूम के उस्ताद—ए—हदीस मुफ्ती रईस अहमद, दारुल उलूम देवबंद से मौलाना मुकीम, मौलाना मूसा कासमी, मौलाना सलीम, कारी नौशाद, कारी दिलशाद, कारी वसीम, शाहिद भाई, मुहम्मद इरशाद, मेराज अहमद, मुनीर अहमद, मौलाना जाबिर, हाफ़िज़ फुरकान असअदी, कारी आज़म, कारी सुहैल, कारी साकिब, कारी फैसल, कारी शुऐब, हाजी मुकीम और जावेद आदि खास तौर पर मौजूद रहे।


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