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कैराना सांसद इकरा हसन ने वंदे मातरम के अर्थ और उसके भाव को विस्तार से समझाते हुए भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमान इंडियंस बाय चॉइस हैं, बाय चांस नहीं है।
वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान सांसद इकरा हसन ने संसद में संबोधन में कहा कि भारतीय मुसलमानों ने जिन्ना के आह्वान को ठुकराकर इसी देश की मिट्टी को अपनाया। उन्होंने बताया कि मुस्लिम समाज ने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद और अशफाक उल्ला खां के विचारों को अपनाया। उन्होंने कहा हम इंडियंस बाय चॉइस हैं, बाय चांस नहीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वंदे मातरम के चुने हुए छंदों को राष्ट्रगीत का रूप देने का निर्णय टैगोर और बोस की सलाह से हुआ था। वर्ष 1998 का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे अनिवार्य बनाने के फैसले का विरोध किया, जिसे उन्होंने राजधर्म बताया। इकरा हसन ने यमुना और गंगा के प्रदूषण, जहरीली हवा, किसानों की बदहाली, कम आय और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रकृति, किसान और नारी सुरक्षित नहीं होंगे तो सुजलाम-सुफलाम का सपना अधूरा रहेगा। उन्होंने सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा.. भी पढ़ा।